Zafar Sir

Hindi Samaas

समास

उदहारण

समस्तपद

अर्थ (विग्रह)

भेद

वनवास

वन में वास

?

राजा रानी

राजा और रानी

?

राजपुरुष

राजा का पुरुष

?

गंगाजल

गंगा का जल

?

 

भेद (समास)

  1. अव्ययीभाव : जिसमे पहला पद प्रधान होता है
  2. तत्पुरुष: जिसमे दूसरा पद प्रधान होता है
  3. दुंदु : जिसमे दोनों पद प्रधान है
  4. बहुब्रीहि : जिसमे कोई पद प्रधान नहीं होता

तत्पुरुष के दो भेद होते हैं

पद -अर्थ – शब्द

राजपुरुष

उदहारण-राजपुरुष कल आया था ( इस वाक्य में दूसरा पद प्रधान है )

राजा -रानी कल आए थे  (इस वाक्य में दोनों पद प्रधान हैं )

 

1.अव्ययीभाव

जिसमे पहला पद प्रधान होता है

अव्ययीभाव पहचानने का trick-  वाक्य में पहला पद अव्यव या उपसर्ग होगा

समस्तपद अर्थ (विग्रह)
यथाविधि विधि के अनुसार
आसेतु सेतु तक
घर घर प्रत्येक घर
आमरण मरण तक

2.तत्पुरुष ( द्विगु)

द्वि – दो

द्विगु पहचानने का trick- जिसमे पहला पद संख्यावाची हो

तिरंगा- तीन रंगो का समाहार

चौराह-चार राहों का समूह

 

अन्य उदहारण

नवरात्र नौ रत्नो का समूह
सतसई सात सौ का समाहार
दो राहा दो राहों का समाहार
सप्ताह सात दिनों का समूह
सप्तऋषि सात ऋषियों का समूह

 

कर्मधारय तत्पुरुष समास

इसमें पहला पद विशेषण और दूसरा पद विशेष्य होता है

trick – है जो , के समान , रुपी

काली मिर्च काली है जो मिर्च
शूरवीर शूरों के समान वीर
गुरुदेव गुरु रुपी देव

 

3. दुंदु : जिसमे दोनों पद प्रधान है

Trick – वाक्य में और या

भाई- बहन भाई और बहन
लव -कुश लव और कुश
थोड़ा- बहुत थोड़ा और बहुत

 

थोड़ा बहुत नमक डाल दो

थोड़ा और बहुत  ❌

थोड़ा या बहुत  ✅

 

अन्न जल अन्न और जल
कृष्णार्जुन कृष्ण और अर्जुन
दिन रात दिन और रात
शीतताप शीत या आतप
काला गोरा काला और गोरा
दाल रोटी दाल और रोटी
यशपायश यश या अपयश
शीतोष्ण शीत या उष्ण
सुरासुर सुर या असुर
देश विदेश देश और विदेश

 

4.बहुब्रीहि : जिसमे कोई पद प्रधान नहीं होता (तीसरा पद प्रधान होता है )

समस्तपद अर्थ (विग्रह) तीसरा पद 
दशानन दश + आनन दश सिर वाला रावण

trick- जिसका, जिसके,  जिसकी ,जो वाला

 

महावीर महान है वीर जो हनुमान
चतुर्भुज चार हैं भुजाएं जिसकी विष्णु
नीलकंठ नीला है कंठ जिसका शिवाजी

अन्य उदहारण

गजानन गज है आनन जिसका गणेश
त्रिनेत्र तीन नेत्र हैं जिसके शिव
लम्बोदर लम्बा है उदर जिसका गणेश
पीताम्बर पीले हैं वस्त्र जिसके कृष्ण
चक्रधर चक्र को धारण करने वाला विष्णु
वीणापाणी वीणा हैं हाथ में जिसके सरस्वती
श्वेताम्बर सफ़ेद वस्त्रों वाली सरस्वती
त्रिलोचन तीन आँखों वाला शिव
चतुरानन चतुर आनन् है जिसके ब्रह्मा
षडानन षट आनन् है जिसके कार्तिकेय

 

कारक विभक्ति चिन्ह
कर्ता ने
कर्म को
करण से
साप्रदान के लिए
अपादान से (अलग होना)
संबंध का के की
अधिकरण में पर
संबोधन हे ! अरे !
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